कहते हैं आदमी का कद नहीं उसका कार्य बड़ा होना महत्वपूर्ण है, ये बात टीम इंडिया के पूर्व तेज गेंदबाज रमाकांत देसाई ने पूरी संसार को साबित की। रमाकांत देसाई महज 5 फीट 4 इंच के तेज गेंदबाज थे,


लेकिन उनकी गति के आगे बड़े से बड़े बल्लेबाज कांपते थे। रमाकांत देसाई की आज 81वीं जयंती है। रमाकांत देसाई (Ramakant Desai) ने हिंदुस्तान के लिए 28 टेस्ट मैच खेल 74 विकेट झटके। उन्होंने मुंबई के लिए 150 फर्स्ट क्लास मैचों में महज 24.10 की औसत से 468 विकेट अपने नाम किये। आइए आपको बताते हैं इस महान क्रिकेटर के बारे में 5 बड़ी बातें।

1. छोटा पैकेट, बड़ा धमाका
रमाकांत देसाई (Ramakant Desai) को छोटा शिकारी बोला जाता था। उनका कद छोटा था लेकिन उनकी गेंदों की गति अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों के होश उड़ा देती थी। अपने पहले ही रणजी सीजन में देसाई ने तहलका मचा दिया था। बॉम्बे के लिए डेब्यू करते हुए देसाई ने महज 11 की औसत से 50 विकेट चटकाए थे। रमाकांत देसाई ने वेस्टइंडीज के विरूद्ध दिल्ली टेस्ट में डेब्यू किया था। इस मुकाबले में हिंदुस्तान को पारी की पराजय का सामना करना पड़ा था। टीम इंडिया ने पहली पारी में 415 रन बनाए लेकिन वेस्टइंडीज की टीम ने 644 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। देसाई ने 49 ओवर तक गेंदबाजी की व 169 रन देकर गैरी सॉबर्स समेत कुल 4 विकेट लिये।

2. पाक के विरूद्ध यादगार पारी
रमाकांत देसाई (Ramakant Desai) को उनकी गेंदबाजी के लिए याद किया जाता है लेकिन उन्होंने बल्ला थामकर भी सुर्खियां बटोरी थी। देसाई ने 1960 में मुंबई के ब्रेबॉर्न स्टेडियम में पाक के विरूद्ध 85 रनों की पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने 206 मिनट तक बल्लेबाजी की व नाना जोशी के साथ 149 रनों की साझेदारी की। बता दें देसाई 10वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे थे। देसाई ने वर्ष 1962-63 रणजी फाइनल में राजस्थान के विरूद्ध अपनी इकलौती सेंचुरी भी जड़ी थी।

3. मोहम्मद हनीफ के शिकारी
मोहम्मद हनीफ की बल्लेबाजी को लोग आज भी याद करते हैं लेकिन रमाकांत देसाई की तेज गेंदों ने उनका क्रीज पर टिकना कठिन कर दिया था। देसाई ने पाक के इस महान बल्लेबाज को कई बार आउट किया। 1960-61 में हुई टेस्ट सीरीज में देसाई ने हनीफ को 9 में से 4 पारियों में पैवेलियन की राह दिखाई।

4. 29 वर्ष की आयु में लिया रिटायरमेंट
रमाकांत देसाई (Ramakant Desai) ने महज 29 वर्ष की आयु में क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। हिंदुस्तान की बेजान पिचों पर देसाई बेहद गेंदबाजी करते थे, जिसकी वजह से उन्होंने जल्दी रिटायरमेंट का निर्णय किया। अगर देसाई को ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड जैसी पिच मिलती तो उनके आंकड़े कुछ अलग ही होते।

5. सचिन को कैप्टन बनाया व हटाया
जिस देश में सचिन (Sachin Tendulkar) को भगवान का दर्जा मिलता है, वहां रमाकांत देसाई ने मास्टर ब्लास्टर की जिंदगी के दो बड़े निर्णय लिये थे। बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता रहे रमाकांत देसाई ने सचिन को कैप्टन बनाया व बेकार प्रदर्शन के बाद उनसे ये जिम्मेदारी भी वापस ली। रमाकांत देसाई ने बेकार स्वास्थ्य के चलते चीफ सेलेक्टर का पद जल्दी छोड़ दिया व अप्रैल 1999 में महज 58 वर्ष की आयु में देसाई का निधन हो गया।