
राजनांदगांव. लॉकडाउन ने लोगों को एक ही जगह बांधकर रख दिया है और इधर उधर फंसे लोग लगातार प्रशासन के समक्ष दूसरे शहर या दूसरे प्रदेश जाने गुहार लगा रहे हैं। स्वास्थ्यगत कारणों के अलावा अन्य कई वजहों के साथ प्रशासन के पास लगातार आवेदन आ रहे हैं। इनमें से कुछ आवेदन अनोखे और दिलचस्प भी हैं। यहां प्रशासन के पास एक महिला का आवेदन आया है जिसमें पति से झगड़ा होने के कारण मायके जाने की अनुमति मांगी है। इसी तरह रायपुर में प्रशासन के पास आए एक आवेदन की जानकारी मिली है जिसमें एक पिता ने गुहार लगाई है कि उसकी पत्नी और बेटी उसके बेटे के साथ लड़की देखने राजनांदगांव गया था और लॉकडाउन में वहीं फंस गया है।
एसडीएम ऑफिस में लगाया आवेदन
एसडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार वाजिब कारणों के साथ ही कुछ दिलचस्प प्रकार के भी आवेदन आ रहे हैं। एक आवेदन शहर की एक महिला ने दिया है जिसमें उसने लॉकडाउन के दौरान पति से लगातार झगड़ा होने के चलते मायके जाने की अनुमति मांगी है। शहर से जुड़ा एक आवेदन रायपुर में भी पहुंचा है। जानकारी के अनुसार रायपुर के देवेंद्र नगर निवासी एक व्यक्ति ने एडीएम कार्यालय रायपुर में आवेदन दिया है कि उसके लड़के की शादी के लिए लड़की देखने लड़के के साथ मां और बहन राजनांदगांव गए थे और लॉकडाउन में वहीं फंस गए हैं। महीनेभर से राजनांदगांव में फंसे अपनी पत्नी, बेटी और बेटे को रायपुर लाने की अनुमति के लिए इस व्यक्ति ने गुहार लगाई है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने केंद्र सरकार ने पहले 22 मार्च को जनता कफ्र्यू लगाया था और इसके बाद 24 मार्च से लॉकडाउन लगा दिया गया। देश में 23 मार्च को राहत जरुर रही लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए 22 मार्च की रात से ही लॉकडाउन लगा दिया था। अचानक लॉकडाउन लगने के चलते बड़ी संख्या में लोग अपने शहर और अपने घर से दूर फंसे हुए हैं और उन्हें घर तक लाने लोग लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशासन के पास लगातार इस तरह के आवेदन आ रहे हैं। यहां एसडीएम कार्यालय में दूसरे राज्यों से अपने परिजनों को लाने के आवेदनों के साथ ही छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहर से परिजनों को लाने और विभिन्न कार्यों से दूसरे शहर जाने के आवेदन आ रहे हैं। इनमें से कई आवेदन बेहद दिलचस्प भी हैं।
स्वास्थ्यगत कारणों में दी जा रही छूट
एसडीएम मुकेश रावटे ने बताया कि उनके पास छत्तीसगढ़ के अलग-अलग शहरों में जाने और परिजनों को लाने के संबंध में अब तक 3 से 4 सौ आवेदन आ चुके हैं। इसके अलावा दूसरे राज्यों में फंसे परिजनों को लाने के लिए भी बड़ी संख्या में आवेदन आ रहे हैं। मुंबई, पुणे, बंग्लुरू, कोटा सहित अन्य शहरों में कोचिंग के लिए गए छात्रों की संख्या को छोड़ दिया जाए तो अन्य प्रदेशों से परिजनों के लिए आए आवेदनों की संख्या ही 25 से ज्यादा है। एसडीएम रावटे ने बताया कि आवेदनों का परीक्षण किया जा रहा है और स्वास्थ्यगत कारणों से मांगी गई अनुमति को मान्य कर उन्हें छूट दी जा रही है।
झूठी जानकारी पर कार्रवाई
प्रशासकीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एसडीएम कार्यालय के साथ ही राज्य सरकार ने ई-पास की सुविधा भी लोगों के लिए दी है। दोनों माध्यम से लोगों को जरूरी पाए जाने पर अनुमति दी जा रही है। अफसरों ने बताया कि कुछ मामलों में गलत जानकारी भी दी जा रही है। ऐसे आवेदनों की बारीकी से जांच हो रही है और झूठा कारण बताकर या झूठा दस्तावेज अपलोड कर अनुमति लेने के मामले में कार्रवाई भी की जाएगी।
कोटा का मामला पड़ा अधर में
शुक्रवार को राजस्थान के कोटा में पढ़ रहे बच्चों को उनके घर लाए जाने की उम्मीद जगी थी लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। उत्तरप्रदेश सहित कुछ प्रदेशों से कोटा में सरकार द्वारा बड़ी संख्या में बसें भेज देने के बाद वहां मची अफरातफरी के चलते राजस्थान सरकार ने बच्चों को वापस भेजने से मना कर दिया है। राज्य सरकार की पहल के बाद यहां कांग्रेस नेताओं ने कोटा में पढ़ रहे बच्चों को लेकर परिजनों से जानकारी मांगी थी लेकिन अब ये बच्चे लॉकडाउन तक यहां नहीं आ पाएंगे।
कोटा में ही होगी व्यवस्था
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजस्थान के कोटा में कोचिंग कर रहे छत्तीसगढ़ के बच्चों की व्यवस्था को लेकर शनिवार को राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बात की है। जानकारी के अनुसार राजस्थान के मुख्यमंत्री गहलोत ने बघेल को आश्वस्त किया है कि कोटा में रह रहे बच्चों को लेकर सभी प्रकार की आवश्यक व्यवस्था कोटा में ही सुनिश्चित की जाएगी। इसके लिए राजस्थान सरकार ने नोडल अधिकारी नियुक्त कर हेल्प लाईन नंबर जारी किया है। मुख्यमंत्री बघेल ने कोटा में पढ़ रहे बच्चों के परिजनों से अपने जिले के कलक्टर को जानकारी देने कहा है ताकि उनके लिए व्यवस्था हो सके और समस्याओं का निराकरण किया जा सके। एसडीएम राजनांदगांव मुकेश रावटे ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान स्वास्थ्यगत कारणों और जरूरी मामलों में लोगों को अनुमति दी जा रही है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए लोगों से इमरजेंसी होने पर ही बाहर जाने के लिए अनुमति लेने कहा गया है। गलत कारण बताकर अनुमति लेने पर कार्रवाई भी होगी।
आ रहे इस तरह के आवेदन
पत्नी और बच्चे को लेने जाने
बाहर पढ़ाई कर रहे बेटे या बेटी को लाने
रिश्तेदारों के यहां फंसे परिजनों को लाने
बीमारी के इलाज के लिए दूसरे शहर जाने
रिश्तेदारी में गमी के चलते अनुमति
परिजनों से मिलने जाने की अनुमति
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