
Security Forces Jammu and Kashmir
लॉकडाउन 1.0 और 2.0 के चलते कश्मीर घाटी में छिपे आतंकी अब बौखला उठे हैं। उनकी सप्लाई चेन टूट चुकी है। सुरक्षा बलों ने 24 घंटे सर्च ऑपरेशन कर आतंकियों को उनके ठिकानों से बाहर निकलने के लिए मजबूर कर दिया है। बौखलाहट में ये आतंकी अब सुरक्षा बलों के नाकों पर हमला कर रहे हैं।
हथियार हैं, मगर खाने-पाने के सामान की किल्लत हो गई है। स्थानीय लोकल स्लीपर सेल से सुरक्षा बलों की मूवमेंट की खबर नहीं मिल रही। जनवरी में जम्मू-कश्मीर पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों के पास 102 पाकिस्तानी मूल के आतंकियों के कश्मीर घाटी में छिपे होने की पुख्ता सूचना रही है।
अब कोरोना के लॉकडाउन पीरियड और उससे पहले लागू हुए सोशल डिस्टेंसिंग के दौरान 30 से ज्यादा आतंकी मारे गए हैं। पिछले साल जहां रोजाना औसतन दो से तीन आतंकी मारे जा रहे थे, वहीं इस साल यह आंकड़ा 3 के पार हो गया है।
हालांकि इन ऑपरेशनों में सुरक्षा बलों के भी दर्जनभर जवान शहीद हुए हैं। सर्च ऑपरेशन से जुड़े एक अधिकारी का दावा है कि 3 मई तक दर्जनों आतंकियों को यमलोक पहुंचा दिया जाएगा।
आतंकियों को छिपने के ठिकाने नहीं मिल रहे
जम्मू-कश्मीर में तैनात केंद्रीय अर्धसैनिक बल के एक बड़े अधिकारी के अनुसार, घाटी में लॉकडाउन पीरियड के दौरान आतंकियों को न तो छिपने का कोई पुख्ता ठिकाना मिल रहा है और न ही उन तक खाने-पीने का पर्याप्त सामान पहुंच सका है।
दूसरा, सुरक्षा बलों के नियमित सर्च ऑपरेशन ने भी आतंकियों को बौखलाहट की स्थिति में ला दिया है। उनके पास एके-47 और एके-74 जैसे अत्याधुनिक हथियार तो हैं, लेकिन ट्रांसपोर्ट सुविधा और खाने-पीने के सामान की चेन टूट गई है।
लॉकडाउन में सभी तरह की गतिविधियां बंद हैं, इसलिए आतंकियों के स्लीपर भी उन्हें कोई मदद नहीं पहुंचा पा रहे हैं। सुरक्षाबलों के मूवमेंट या सर्च ऑपरेशन की सही जानकारी आतंकियों को नहीं मिल रही।
पहले वे ट्रकों में सवार होकर इधर-उधर निकल जाते थे, लेकिन अब कश्मीर में ट्रांसपोर्ट भी पूरी तरह बंद है। ऐसे में ये आतंकी सुरक्षाबलों के लगाए नाके पर हमला करते हैं। पिछले एक सप्ताह में सीआरपीएफ के नाके पर ऐसे तीन हमले हो चुके हैं।
शनिवार को बारामूला जिले के सोपोर में बड़ा आतंकी हमला हुआ, जिसमें सीआरपीएफ के तीन जवान शहीद हो गए है और दो बुरी तरह जख्मी हुए हैं। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
पिछले साल मारे गए थे 160 आतंकी
जम्मू-कश्मीर पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह के मुताबिक, गत वर्ष जम्मू-कश्मीर में 160 आतंकवादी मारे गए थे। इनमें सेना, अर्धसैनिक बल और जेएंडके पुलिस के ऑपरेशन शामिल हैं। आतंकियों के खिलाफ कई ऑपरेशन संयुक्त तौर पर भी किए गए हैं।
पाकिस्तान से आए करीब 102 आतंकी घाटी में सक्रिय हैं, यह जानकारी सुरक्षाबलों के पास है। उनके ठिकाने कहां पर हैं, इसका अंदाजा है। चूंकि पिछले साल सुरक्षा बलों ने लगातार कई बड़े ऑपरेशनों को अंजाम दिया था, इसलिए साल के अंत तक हम बड़ी संख्या में आतंकियों को मार गिराने में कामयाब हो सके।
आतंकियों की बौखलाहट का एक कारण यह भी है कि उन्हें लॉकडाउन में लोकल स्पोर्ट उतना नहीं मिल पा रहा है। नई भर्ती के लिए उन्हें जूझना पड़ रहा है। 2018 के दौरान घाटी के 218 युवा ऐसे थे, जो आतंकवादी संगठनों के बहकावे में आ गए थे।
जब चारों तरफ से आतंकी मारे जाने लगे तो 2019 में यह ग्राफ कुछ नीचे आया। यानी गत वर्ष करीब 140 स्थानीय युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए थे। इनमें से भी कई युवा वापस लौट आए हैं, जबकि कुछ पकड़े गए हैं।
ये लोग हैंड ग्रेनेड फेंकना, आत्मघाती हमला या स्लीपर सेल बनकर आतंकियों को सुरक्षा बलों के मूवमेंट की जानकारी देना, आदि काम करते थे। अब बहुत हद तक ऐसे मामलों पर रोक लगी है।
सर्च ऑपरेशनों में मारे गए इतने आतंकवादी ...
सुरक्षा बलों ने गत शुक्रवार को चार आतंकवादियों को मार गिराया था। ये ऑपरेशन इंटेलिजेंस रिपोर्ट पर आधारित था। एक मुठभेड़ शोपियां में तो दूसरी जम्मू के सुंदर गांव में हुई। मारे गए आतंकियों के पास एके-47, इंसास और एके-74 जैसे स्वचालित हथियार बरामद हुए थे।
11 अप्रैल को कुलगाम में आतंकियों के हथियार जब्त किए गए। सात अप्रैल की मुठभेड़ ऐसी थी, जिसमें सेना ने पांच आतंकियों को मारा था, लेकिन उस ऑपरेशन में पैरा यूनिट के पांच कमांडों भी शहीद हो गए थे।
अप्रैल के पहले सप्ताह में ही कुलगाम में हिजबुल के 4 आतंकियों को यमलोक पहुंचाया गया। 15 मार्च को अवंतीपोरा जिले में चार आतंकी मारे गए। 22 फरवरी को दक्षिण कश्मीर के संगम बिजबेहरा में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया था। इसमें दो आतंकियों को मार दिया गया। 19 फरवरी को पुलवामा में 3 आतंकी मारे गए थे।
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