
नई दिल्ली. कोरोना वायरस महामारी संकट की वजह से देश में चल रहे लॉकडाउन से अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है. ऐसे में इकोनॉमी को वापस पटरी पर लाने के लिए आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि आरबीआई कोरोना वायरस को लेकर सतर्क है. इस तरह के माहौल से आरबीआई करीब से निगरानी कर रहा है. इसके अलावा आरबीआई ने बैंकों को राहत देते हुए 30 जून तक उन्हें एनपीए (डूबे कर्ज) को लेकर बड़ी छूट मिली है. बैकों को अब इस समय एनपीए घोषित नहीं करने होंगे. साथ ही, आरबीआई ने बैंकों से ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों को ईएमआई में छूट देने के लिए कहा है.
गवर्नर ने बाताया कि रेपो रेट में कोई चेंज नहीं किया गया है. ये 4.4 फीसदी पर स्थिर है. वहीं, रिवर्स रेपो रेट 0.25 फीसदी से घटाकर 3.75 फीसदी किया.
2020 ग्लोबल इकोनॉमी के लिए सबसे बड़ी मंदी का साल है.G-20 देशों में भारत की स्थिति बेहतर रहेगी. इन सब के बीच बैंकिंग कारोबार सामान्य बनाए रखने की कोशिशे जारी है. कोरोना वायरस का असर IIP पर असर फरवरी आंकड़ों के बाद दिखेगा.
तीनों एजेंसी को रेपो रेट पर कर्ज मिलेगा. NHB को 10 हजार करोड़ रुपये और नाबार्ड को 25 हजार करोड़ रुपये मिलेंगे.
लेकिन अच्छी बात ये हैं कि इस बार भारतीय मौसम विभाग ने इस साल अच्छे मानसून की उम्मीद जताई है. इससे देश की अर्थव्यवस्था को सहारा मिलेगा.
शक्तिकांत दास ने कहा कि देश के मौजूदा समय में विदेशी मुद्रा का पर्याप्त भंडार है. हालांकि, मार्च में देश के एक्सपोर्ट की हालात बेहद खराब रही है.
आपको बता दें कि इससे पहले मोदी सरकार ने कोरोना के कहर से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपये के राहत पैकेज का एलान किया था.
वहीं, RBI ने मार्च के अंत में ब्याज दरों (रेपो रेट) में 0.75 फीसदी कटौती का ऐलान किया. अब यह घटकर 4.4 फीसदी पर आई गई है. इसके बाद ही आम लोगों की EMI में कमी आई है. इसके अलावा बैंकों ने तीन महीने तक EMI नहीं चुकाने की छूट भी ग्राहकों को दी है.
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