दो बातें उनसे की तो दिल का दर्द खो गया,


लोगों ने हमसे पूछा कि तुम्हें क्या हो गया,


बेकरार आँखों से सिर्फ हँस के हम रह गए,


ये भी ना कह सके कि हमें इश्क़ हो गया...।



एहसास-ए-मुहब्बत के लिए


बस इतना ही काफी है,


तेरे बगैर भी हम, तेरे ही रहते हैं...।



ऐ आशिक तू सोच तेरा क्या होगा,


क्योंकि हस्र की परवाह मैं नहीं करता,


फनाह होना तो रिवायत है तेरी,


इश्क़ नाम है मेरा मैं नहीं मरता।



तुम को तो जान से प्यारा बना लिया;


दिल का सुकून आँख का तारा का बना लिया;


अब तुम साथ दो या ना दो तुम्हारी मर्ज़ी;


हम ने तो तुम्हें ज़िन्दगी का सहारा बना लिया।




तेरा प्यार मेरी जिंदगी में


बहार ले कर आया है,


तेरे आने से पहले हर दिन


पतझड़ हुआ करता था ।



होश आये तो क्यों कर तेरे दीवाने को,


एक जाता है तो दो आते हैं समझाने को ।इश्क़ करने से पहले जात नहीं पूछी जाती महबूब की


कुछ तो है दुनिया में जो अाज तक मज़हबी नही हुअा ।।



तन्हाइयों में मुस्कुराना इश्क़ है,


एक बात को सब से छुपाना इश्क़ है,


यूँ तो नींद नहीं आती हमें रात भर,


मगर सोते-सोते जागना और,


जागते-जागते सोना ही इश्क़ है।