मुंबई। भारतीय क्रिकेट टीम के ऑलराउंडर युवराज सिंह इन दिनों कोविड 19 महामारी के खिलाफ चल रही लड़ाई में खूब सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ वो सोशल मीडिया पर भी खूब एक्टिव हैं। वो लगातार इंस्टाग्राम लाइव चैट में हिस्सा ले रहे हैं और इस दौरान वो अपनी बातों के साथ-साथ पुरानी बातें भी शेयर करते नजर आ रहे हैं।


एक लाइव चैट के दौरान युवराज सिंह ने एक बड़ा खुलासा किया है। युवराज ने कहा है कि बतौर भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने मिडिल ऑर्डर बैट्समैन सुरेश रैना को ज्यादा मौका दिया था। सुरेश रैना और युवराज सिंह भारत की वर्ल्ड कप 2011 विनिंग टीम का हिस्सा थे, जिसके कप्तान महेंद्र सिंह धोनी थे। युवी ने खुलासा किया है कि श्रीलंका के खिलाफ वर्ल्ड कप 2011 के फाइनल के दौरान रैना और युसुफ पठान में से किसी एक को चुनने पर काफी माथापच्ची हुई थी।


बाएं हाथ के दिग्गज बल्लेबाज युवराज सिंह ने स्पोर्टस तक से बात करते हुए कहा है, "सुरेश रैना के पीछे बड़ी सपोर्ट थी, क्योंकि महेंद्र सिंह धोनी उनका समर्थन करते थे। हर एक कप्तान का एक पसंदीदा खिलाड़ी होता है और मेरा मानना है कि महेंद्र सिंह धोनी ने उस समय कप्तान के तौर पर सुरेश रैना को ज्यादा मौका दिया। पूर्व ऑलराउंडर ने कहा है, "युसुफ पठान उस समय अच्छा प्रदर्शन कर रहा था और यहां तक मैं भी अच्छी फॉर्म था और विकेट भी ले रहा था।


सुरेश रैना उस समय अच्छी लय में नहीं था। उस समय हमारे पास लेफ्ट-आर्म स्पिनर नहीं था और मैं विकेट ले रहा था, इसलिए मुझे चुनने के अलावा कोई विकल्प उनके पास नहीं था। जाहिर है कि सुरेश रैना एमएस धोनी की कप्तानी में लगातार खेले थे, लेकिन जैसे ही टीम की कप्तानी विराट कोहली के हाथ में आई तो वे अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर होते चले गए।


जुलाई 2018 में सुरेश रैना ने अपना आखिरी वनडे मैच खेला था। उस साल भारत ने 5 वनडे सीरीज खेली थीं, लेकिन सिर्फ एक सीरीज में रैना टीम के हिस्सा थे। इतना ही नहीं, सुरेश रैना ने अपना आखिरी टेस्ट मैच 2014-15 के ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर खेला था। रैना उस टेस्ट मैच का आखिरी बार हिस्सा थे, जिसके बाद एमएस धोनी ने टीम की कप्तानी तो छोड़ ही दी थी, टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का ऐलान भी कर दिया था। इसके बाद से रैना ने एक भी टेस्ट मैच नहीं खेला है।


टीम इंडिया के लिए 18 टेस्ट व 228 वनडे खेले वाले रैना फिलहाल टीम इंडिया में वापसी की कोशिशों में जुटे हैं। कई बार उन्होंने फिर से खेलने की इच्छा जताई है, लेकिन चयन समिति की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।