
नई दिल्ली: स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल से नोमोफोबिया नाम की बीमारी हो गई है, जिसमें यूजर (USER) को इस बात का सख्त डर है कि उसका फोन खो जाएगा और उसे इसके बिना रहना पड़ेगा। । एडोब के एक अध्ययन के अनुसार, भारत में अधिकांश युवा इस फोबिया से पीड़ित हैं। 10 में से तीन लोग एक से अधिक डिवाइस का उपयोग करते हैं और वे 90 प्रतिशत काम डिवाइस के साथ करते हैं।
अध्ययन के अनुसार, 50 प्रतिशत उपभोक्ता मोबाइल पर काम करना शुरू कर देते हैं और मोबाइल पर गतिविधियाँ शुरू कर देते हैं। मोबाइल फोन के लंबे समय तक इस्तेमाल से गर्दन में दर्द, सूखी आंखें, कंप्यूटर विजन सिंड्रोम और अनिद्रा हो सकता है। अध्ययन में यह भी पाया गया कि 20 से 30 वर्ष के बीच के लगभग 60 प्रतिशत युवाओं को अपना मोबाइल फोन खोने का खतरा है।
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